भविष्य बदरी
उत्तराखंड के पंच बदरी में से एक
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित तहसील जोशीमठ ब्लॉक में छोटा सा गाँव सुभाँई स्थित है| इस गाँव के ऊपर घने पेड़ो के बीच में एक छोटा सा मंदिर है जिसे भविष्य बदरी के नाम से जाना जाता है | यह मंदिर समुद्रतल से 2744 मीटर की ऊँचाई पर घने जंगलो के अन्दर स्थित है
भविष्य बदरी उत्तराखंड के पंच बदरी ( बद्रीनाथ, योगध्यान बदरी, वृद्ध बदरी,आदि बदरी,भविष्य बदरी) में से एक है |
भविष्य बदरी की कहानी
भगवान नर्सिंग का मंदिर
भगवान नृसिंह का अद्भुत विग्रह
इस घटना से जुड़ी एक मान्यता है कि जोशीमठ में जहां शीतकाल में बद्रीनाथ की चलमूर्ति रहती है वहां भगवान नृसिंह का एक मंदिर है। जहां शालिग्राम शिला में भगवान नृसिंह का एक अद्भुत विग्रह है। इस विग्रह की बायीं भुजा पतली है और समय के साथ यह और भी पतली होती जा रही है। जिस दिन इनकी कलाई टूट जाएगी उस दिन नर-नारयण पर्वत एक हो जाएंगे।
और भगवान नारायण की पूरी आकृति भविष्य बदरी में प्रकट हो जाएगी |
भगवान बद्रीनाथ का महत्व
कहते हैं कि जो भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करता है उनका पुनर्जन्म नहीं होता है। यह भगवान विष्णु का दूसरा वैकुण्ठ यानी निवास स्थान है। इस धाम के विषय में पुराणों में उल्लेख मिलता है कि सतयुग में यहां भगवान विष्णु का साक्षात दर्शन हुआ करता था। शास्त्रों में वर्तमान बद्रीनाथ यानी बद्री विशाल धाम को भगवान का दूसरा निवास स्थान बताया गया है। इससे पहले भगवान आदि बद्री धाम में निवास करते थे। और भविष्य में जहां भगवान का धाम होगा उसे भविष्य बदरी कहा गया है।
भगवान की आधी आकृति
भविष्य बद्री जोशीमठ से 23 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहां मंदिर के पास एक शिला है, इस शिला को ध्यान से देखने पर भगवान की आधी आकृति नज़र आती है। जब यह आकृति पूर्ण रूप ले लेगी तब यहीं ब्रदीनाथ के दर्शन का लाभ प्राप्त किया जाएगा।
अभी इसकी आकृति आधी ही उभर पाई है |
भगवान नारायण इस स्थान पर भविष्य में बिराजमान होंगे और सभी भक्तो को दर्शन देंगे |
भविष्य बदरी मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया है, वर्तमान में बद्री केदार मन्दिर समिति ने आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित भविष्य बदरी मन्दिर का नव निर्माण कार्य को शुरू करने के लिए भूमि पूजन किया गया|
यहाँ के लोगो का मानना है की रात के समय मंदिर से घंटियों और ढोल की आवाज सुनाई देती है |
यहाँ पर भगवान नारायण की पूजा अर्चना होती है| और भक्त यहाँ भी दर्शन करने के लिए आते है |





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