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कोरोना महामारी के चलते इस बार देरी से खोले जा रहे है,हेमकुंड साहिब के कपाट|
Valley of Flowers हेमकुण्ड साहिब
हेमकुण्ड चारो और से सात पर्वतों से घिरा है | जिन्हे सप्तश्रृंग चोटियों के नाम से भी जाना जाता है| पंजाबी में कहा जाता है - हेमकुण्ड पर्वत है जहा सप्तश्रृंग शोभत है यहाँ सात पर्वतों की श्रृंखला के मध्य में हेमकुण्ड साहिब सुशोभित है | हेमकुण्ड गढ़वाल मंडल के चमोली के जोशीमठ ब्लॉक में सात हिमालय चोटियों के मध्य में स्थित है | इसकी समुद्र ताल से ऊँचाई 4329 मीटर है |
इस कुण्ड को उसके चारो ओर की सात हिमयुक्त चोटियों से जल प्राप्त होता है| इस कुण्ड से एक जल की धारा/ गाड़ निकलती है जिसे हेमगंगा कहा जाता है | 6 किलोमीटर नीचे यह पुष्पावती नदी से मिलती है जिसके बाद यह लक्ष्मण गंगा के नाम से जानी जाती है|
पुष्पावती और हेमगंगा का संगम घांघरिया में होता है | पुष्पावती नदी फूलो की घाटी से निकलती है|
हेमकुण्ड झील / कुण्ड गुरु गोविन्द सिंह के नाम से भी जानी जाती है व इस झील का दूसरा नाम लोकपाल भी है और इस झील का पुराना नाम " दण्ड पुष्करनी" है |
यह माना जाता है की सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह ने यहाँ तपस्या की थी | 1930 में हवलदार सोहन सिंह ने यह पवित्र स्थान देखा | उसके बाद सिक्खों द्वारा गुरुद्वारा का निर्माण किया गया| इस मंदिर के किनारे एक लक्ष्मण मंदिर भी स्थित है|
हेमकुण्ड साहिब के कपाट प्रत्येक वर्ष 1जून को खोले जाते हैं व 5अक्टूबर को बंद कर दिए जाते हैं यह यात्रा केवल चार महीने के लिए होती है यहाँ पर मुख्य रूप से सिक्ख धर्म के लोग अपनी यात्रा करते है, यह उनका पवित्र स्थान है |
गुरुद्वारा के पुजारी को मुख्य ग्रंथि कहा जाता है| जो गुरूद्वारे में पाठ, सबद व कीर्तन का पाठ करते है|
गुरुद्वारा सुबह 4 बजे खुलता है और रात्रि के 9 पर बंद होता है |
गोविंदघाट से हेमकुण्ड के लिए 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा है जो घोड़े - डण्डी एवं कण्डी आदि के द्वारा भी की जाती है | वर्तमान मे गोविंदघाट से पुलना के लिए ३ किलोमीटर का सड़क मार्ग बन चुका है जिससे अब हेमकुण्ड की पैदल यात्रा 17 किलोमीटर रह गयी है |
पर्यटन राष्ट्रीय पार्क नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व
फूलों की घाटी
फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व का द्वितीय कोर जोन है व बद्रीनाथ के पूर्व में स्थित है | फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क 7 फरवरी 2002 से नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व के अन्तर्गत आया तथा इसे UNESCO द्वारा भौतिक विश्व विरासत का दर्जा प्रदान किया गया है | यह राष्ट्रीय पार्क घांघरिया से शुरू हो जाता है जो की घांघरिया से 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित था लेकिन वर्ष 2013 की आपदा के बाद नया रास्ता बनने के कारण यह दूरी 5 से 6 किलोमीटर हो गयी है| इस घाटी के ठीक सामने रत बन ग्लेसियर व भ्यूंडार खाल पड़ता है | इसके ठीक पीछे कुण्डखाल बाएँ से नर पर्वत इस घाटी को बद्रीनाथ से अलग करती है तथा दाँए ओर से जंगलो की घनी पहाड़ी है | इस जंगल के नीचे बुग्याल स्थित है |
भ्यूंडार खाल से 2 ट्रैक किये जा सकते है |
- फूलों की घाटी से माणा बद्रीनाथ |
- फूलों की घाटी से गमशाली नीति |
इस घाटी से पुष्पावती नदी, जिसका उदगम रतबन श्रेणी व नीलगिरि पर्वत के तली में स्थित ग्लेशियर से होता है | यह नदी इस घाटी में अनेक झरनो का निर्माण करती है जो इस घाटी की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है |
यह राष्ट्रीय पार्क उत्तराखंड का सबसे छोटा राष्ट्रीय पार्क है जिसका क्षेत्रफल 87.5 वर्ग किलोमीटर है | इस घाटी की लम्बाई 10 किलोमीटर व चौड़ाई 2 किलोमीटर है | इस घाटी की ऊँचाई 3200-6675 मीटर है | इस घाटी का भौगोलिक विस्तार 30 डिग्री 41' मिनट से 30 डिग्री 48'मिनट उत्तरी अक्षांस व 79 डिग्री 33'मिनट से 79 डिग्री 46' मिनट पूर्वी देशांतर है |
इस घाटी को सर्वप्रथम फ्रैंक स्मिथ ने 1931 ई० में देखा था जब वो अपने कामेट अभियान को पूरा करके वापस लौट रहे थे | यह घाटी अनेक रंग - बिरंगे फूलो से ढकी थी | जिस कारण फ्रेंक स्मिथ ने इसका नाम "फूलों की घाटी" रखा | इस घाटी में फूलो की 2000 से भी अधिक प्रजाति पाई जाती है |
फूलों की घाटी का ट्रेक घने जंगलों से होकर पुष्पावती नदी तक जाता है और रास्ते में कई पुलों, ग्लेशियरों और झरनों को पार करके पहुंचा जा सकता है।






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